राजस्थान के उदयपुर में मिली नई कवक की प्रजाति

 राजस्थान के उदयपुर में मिली नई कवक की प्रजाति

उदयपुर जिले के उभेश्वर वन क्षेत्र में कोरल फन्जई कवक प्रजाति का पता चला है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में फीयोक्लेवूलिना जिपेली पहचाना जाता है।

इस प्रजाति को राजस्थान में  प्रथम बार ढूंढने का श्रेय सेवानिवृत वन अधिकारी डॉ. सतीश शर्मा व फाउन्डेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्यूटी आनंद गुजरात के फील्ड बायोलॉजिस्ट डॉ. अनिल ससावन को जाता है।

डॉ. शर्मा के अनुसार भूरे व नीले रंग की सुंदर कवक जो हरे बांसों के धरों में भूमिगत भागों पर उगती है। इस कवक को छः अलग अलग बांसों के धूरों में देखा गया है। यह कवक बार-बार द्विशाख विभाजन कर बढ़वार करती है। कवक की शाखाएं लगभग पैन की रिफिल की मोटाई की होती है। ये नीचे की तरफ भूरे रंग की तथा उपरी छोर पर नीले रंग की होती है। हर शाखा दो उपशाखाओं में विभाजित होकर बढ़ती है। इस प्रकार छः चक्र तक विभाजन देखा गया है। मानसून काल में यह भूरे व नीले रंग की होती है लेकिक बाद में काले रंग की होकर सूख जाती है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि यह कवक उदयपुर के ऊचें पहाड़ी क्षेत्र उभेश्वर महादेव के समीप क्षेत्रों में नजर आई है। अभी तक इसे महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में देखा गया है। राजस्थान दूसरा राज्य है जहां यह प्रजाति मिली है। भारत के अलावा यह कवक श्रीलंका, जावा, मलेशिया, बोर्नियों, न्यू गिनी एवं उत्तरी केलेडोनिया में देखी गई है। इस नये कवक की खोज का विवरण इंडियन जनरल ऑफ एनवारमेंट साइंस के अंक 27 (1) में प्रकाशित हुआ है।

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