अरावली की गोद में बदलाव की खेती: झाड़ोल-फलासिया के अनुसूचित जाति किसानों ने सीखी मशरूम की वैज्ञानिक तकनीक

 अरावली की गोद में बदलाव की खेती: झाड़ोल-फलासिया के अनुसूचित जाति किसानों ने सीखी मशरूम की वैज्ञानिक तकनीक

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के अधीन महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर में संचालित अखिल भारतीय समन्वित मशरूम अनुसंधान परियोजना द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीएसपी) के अंतर्गत ग्राम पंचायत निचली सिगरी, पंचायत समिति फलासिया में एक दिवसीय मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान परियोजना प्रभारी प्रोफेसर नारायण लाल मीना ने किसानों को मशरूम के पोषणीय एवं औषधीय गुणों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मशरूम रक्तचाप को नियंत्रित करने, मधुमेह एवं हृदयाघात के जोखिम को कम करने, कैंसर एवं अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों के प्रतिरोध में सहायक होने के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। इसके साथ ही उन्होंने ढींगरी, बटन एवं दूधछाता मशरूम की वैज्ञानिक खेती की तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला और फसलों व सूखी लकड़ी के अवशेषों को मशरूम उत्पादन में उपयोग करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में अविनाश कुमार नागदा एवं किशन सिंह राजपूत ने मशरूम खेती से संबंधित प्रायोगिक जानकारी साझा की। वहीं झाड़ोल-फलासिया के वरिष्ठ पत्रकार धनराज गरासिया ने प्रशिक्षणार्थियों से संवाद करते हुए डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखित भारतीय संविधान में निहित अधिकारों को अंगीकार करने की शपथ दिलाई।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंचायत समिति फलासिया के 10 गांवों से कुल 30 महिला एवं पुरुष किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को मशरूम खेती से संबंधित आवश्यक सामग्री वितरित की गई।

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