होमियोपैथी पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन

 होमियोपैथी पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन

जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय) के संघटक होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय की ओर से के संस्थापक मनीषी पंडित जनार्दनराय नागर की 112वीं जयंती पर आयोजित सात दिवसीस समारेाह के तहत सोमवार को “आज के परिप्रेक्ष्य में होम्योपैथिक पद्धति की सार्थकता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन हुआ.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति कर्नल प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि बीमारियां अस्वस्थ खान-पान और तनावपूर्ण जीवन जीने के कारण होती हैं। वर्तमान युग में साक्ष्य-आधारित होम्योपैथी चिकित्सा के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता है।

वेबिनार में डॉ. नवीन विश्नोई, डॉ. लिली जैन, डॉ. अजीता रानी, डॉ. एजाज हुसैन, डॉ. प्रियंका कोठारी सहित 268 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

तकनीकी सत्र की शुरुआत वर्तमान परिदृश्य में होम्योपैथी के लाभ और यह शरीर में कैसे कार्य करता है, पर चर्चा से प्रारम्भ हुई। बिजनौर के डॉ. कपिल शर्मा ने वर्तमान जीवन शैली विकार जैसे महिलाओं पर ओसीपी के खराब प्रभाव, लंबे समय तक बैठने वाली कार्य संस्कृति, कैंसर के मामलों की संख्या में वृद्धि और होम्योपैथिक दवाओं, कोविड के बाद की कमज़ोरी और कोविड के बाद बालों के झड़ने जैसे मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करते हुए उनकी चिकित्सा की चर्चा की। उन्होंने दुर्लभ दवाओं पर भी चर्चा की और इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों को भी बताया, तथा लकवाग्रस्त व्यक्तियों में हेलोडर्मा, कोविड के बाद की कमजोरी में नेट्रम सैलिसिलेट, हिर्सुटिज़्म के मामलों में ओलियम जैकोरिस जैसी दवाओं के उपयोग को बताया।

प्राचार्य डॉ. राजन सूद ने स्वागत उद्बोधन में वर्तमान युग में होम्योपैथी का महत्व, आधुनिक जीवन शैली व जीवन शैली विकार में कैसे होम्योपैथी अद्भुत परिणाम देती है, पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मीनाक्षी श्रीवास ने किया जबकि धन्यवाद की रस्म अदायगी डॉ. बबीता रशीद ने की व तकनीकी समन्वयन डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी ने किया। तकनीकी सहयोग विकास डांगी ने किया।

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