जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा : सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जीवंत हुई आदिम संस्कृति


जनजातीय गौरव दिवस पखवाड़ा के अंतर्गत शनिवार शाम नगर निगम के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में भव्य जनजातीय सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में जनजातीय लोक कलाकारों ने अपनी समृद्ध परंपराओं, लोक-संस्कृति और विरासत को मनोहारी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत कर दिया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ टीएडी उपायुक्त निरमा विश्नोई और पर्यटन विभाग की उपनिदेशक शिखा सक्सेना की उपस्थिति में हुआ। दोनों अधिकारियों ने जनजातीय कलाकारों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि उदयपुर की जनजातीय पहचान अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपराओं और कला के कारण वैश्विक स्तर पर विशेष स्थान रखती है।
मंच पर जनजातीय कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ उतरे, जहां गेर नृत्य, गवरी नृत्य, स्वागत गीत, और कई अन्य लोक प्रस्तुतियों ने सभागार का माहौल ऊर्जा और उत्साह से सराबोर कर दिया।
लोक कलाकार अमित गमेती और उनकी टीम ने मेवाड़ की विश्वप्रसिद्ध लोक नाटिका गवरी का दमदार मंचन किया।
वहीं, गंगाराम के नेतृत्व में जनजातीय महिला समूह ने आकर्षक लोक गीत ‘पधारो परदेसी पामणा’ प्रस्तुत कर दर्शकों की तालियां बटोरीं।
केसूलाल एवं टीम की गेर नृत्य प्रस्तुति ने सभागार में मौजूद सभी लोगों को रोमांचित कर दिया। इससे पूर्व जनजाति विद्यार्थियों ने भी गीत, लोकगीत और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
अतिथियों ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। इस कार्यक्रम ने संदेश दिया कि जनजातीय कला, संगीत और लोकनृत्य न केवल हमारी विरासत हैं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान भी हैं।
कार्यक्रम का संचालन रणवीरसिंह राणावत ने किया।











