‘द प्रपोजल’ में दिखी प्यार की अनोखी दास्तां

 ‘द प्रपोजल’ में दिखी प्यार की अनोखी दास्तां

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर द्वारा आयोजित मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत रविवार को ‘द प्रपोजल’ नाटक का मंचन किया गया। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में इस प्रस्तुति को खूब सराहा गया।

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक फुरकान खान ने बताया कि प्रति माह आयोजित होने वाली मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत अनंगारि थिएटर, बांसवाड़ा द्वारा ‘द प्रपोजल’ नाटक का मंचन रविवार को शिल्पग्राम, उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में किया गया। इस नाटक के लेखक प्रसिद्ध रूसी लेखक एंतोन चेखव हैं और निर्देशन नरेशपाल सिंह चौहान द्वारा किया गया।

इस नाटक में नरेशपाल सिंह, जगन्नाथ तेली, अरुंधति कलिता, मनस्विनी, आद्यवीर, सूरज प्रताप सिंह, इंद्रजीत सिंह, कुलदीप सिंह और भूमि सहित अन्य कलाकारों ने भाग लिया। रंगमंच प्रेमियों ने केंद्र की इस पहल की सराहना करते हुए ऐसे आयोजन निरंतर करते रहने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में केंद्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, सी.एल. सालवी सहित शहर के कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सिद्धांत भटनागर ने किया।

नाटक की कहानी

यह नाटक अमीर परिवारों की उस प्रवृत्ति पर व्यंग्य करता है जिसमें वे आर्थिक लाभ के लिए अपने बच्चों के विवाह अन्य अमीर परिवारों में करवाने की कोशिश करते हैं ताकि संपत्ति का विस्तार हो सके। यह संवाद-आधारित नाटक परिस्थितिजन्य हास्य से भरपूर है।

कहानी एक युवक से शुरू होती है जो अपने पड़ोसी की बेटी को शादी का प्रस्ताव देता है। बातचीत के दौरान दोनों के बीच तीखी बहस छिड़ जाती है, और जब लड़की का पिता बीच में आता है, तो स्थिति और भी हास्यास्पद हो जाती है। इसके बाद तीनों इस बात पर भी बहस करने लगते हैं कि किसका कुत्ता बेहतर है।

नाटक का निष्कर्ष यह दर्शाता है कि कैसे धन की लालसा अमीर परिवारों को अपने विवादों के बावजूद आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद रिश्तों में बांध देती है। यह कथा प्रेम, अहंकार और स्वार्थ के बीच उलझे तीन पात्रों के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दर्शकों को हास्य के माध्यम से गहरी सामाजिक सच्चाइयों से रूबरू कराती है।

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