शिल्पग्राम उत्सव-2025: फोक इंस्ट्रूमेंट्स की सिंफनी और लोक नृत्यों ने मनमोहक रंग बिखेरा

 शिल्पग्राम उत्सव-2025: फोक इंस्ट्रूमेंट्स की सिंफनी और लोक नृत्यों ने मनमोहक रंग बिखेरा

शिल्पग्राम उत्सव-2025 के नौवें दिन सोमवार को मुक्ताकाशी मंच पर प्रस्तुत म्यूजिकल सिंफनी ने संगीत प्रेमियों का मन मोह लिया। राजस्थान से कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ तक के विभिन्न राज्यों के करीब तीन दर्जन फोक इंस्ट्रूमेंट्स—खरताल, रबाब, मोरचंग, पुंग, ढोल-ढोलक-ढोलकी, मादल, सारंगी, बांसुरी, मटकी, रणसिंगा, करनाल, बीन, हार्मोनियम, भपंग और अलगोजा—ने ताल और धुनों के अनोखे सवाल-जवाब में श्रोताओं का दिल जीत लिया। गगनभेदी सुरमई आलाप के साथ इन वाद्य यंत्रों ने शानदार सामूहिक प्रस्तुति दी, जिसे देख कर दर्शक बार-बार वाह-वाह कर उठे।

लोक नृत्यों का रंगीन प्रदर्शन

सिंफनी से पूर्व मंच पर विभिन्न राज्यों के लोक नृत्यों ने भी खूब वाहवाही बटोरी। मोर पंखों वाले कॉस्ट्यूम में प्रस्तुत मयूर नृत्य ने राजस्थान में मोर-मोरनी के प्रेम और ब्रज क्षेत्र में राधा-कृष्ण की लीलाओं को जीवंत कर दिया। मणिपुर के पुंग ढोल चेलम नृतकों ने लयबद्ध और ऊर्जावान प्रदर्शन किया, जिसमें मार्शल आर्ट के तत्व भी शामिल थे। पश्चिम बंगाल के राय बेंसे और पुरुलिया छाऊ, महाराष्ट्र की लावणी और राजस्थान की कालबेलिया नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

मेवात क्षेत्र का भपंग वादन, उत्तराखंड का छापेली और असम का बिहू नृत्य अपनी सौम्यता से दर्शकों को आकर्षित कर गया। थांग-ता स्टिक डांस, गुजरात का सिद्धि धमाल, पंजाब का भांगड़ा और पश्चिम बंगाल का नटुआ दर्शकों में उत्साह भरने वाले प्रमुख आकर्षण रहे। कार्यक्रम का संचालन दुर्गेश चांदवानी और डॉ. मोहिता दीक्षित ने किया।

‘हिवड़ा री हूक’ और थड़ों पर कार्यक्रम

बंजारा मंच पर चल रहे ‘हिवड़ा री हूक’ कार्यक्रम ने भी अपने अंतिम दिन उमंग और उत्साह बनाए रखा। मेलार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जबकि समन्वयक सौरभ भट्ट ने क्विज प्रतियोगिता से कार्यक्रम को और रोचक बनाया।

सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक विभिन्न थड़ों पर आदिवासी गेर व चकरी, बाजीगर, तेरहताली, बीन जोगी, भवई, कुच्छी ज्ञान, मांगणियार गायन, गलालेंग, घूघरा-छतरी, रिखिया ज्ञान, पावरी, कठपुतली, तारपा, नाद जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रांगण में बहरूपिये, स्कल्पचर्स और झोंपड़े मेलार्थियों के फेवरिट सेल्फी पॉइंट्स बने।

कल उत्सव की आखिरी शाम

मंगलवार की शाम मुक्ताकाशी मंच पर उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान द्वारा निर्देशित म्यूजिकल सिंफनी, लावणी, पुरुलिया छाऊ, ढेड़िया, पुंग ढोल चेलम, गोटीपुआ, डांग, बिहू, कालबेलिया, राय बेंसे, कावड़ी कड़गम, सिद्धि धमाल, सिंघी छम, मयूर, छापेली, भांगड़ा, नटुआ और थांग-ता-स्टिक लोक नृत्यों के साथ उत्सव का भव्य समापन करेगी। मेवात क्षेत्र का भपंग वादन इस मौके पर श्रोताओं के लिए खास आकर्षण होगा।

सांसद ने भी देखी प्रस्तुतियां

राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया ने सोमवार शाम मुक्ताकाशी मंच पर प्रस्तुतियों का अवलोकन किया और कलाकारों की हौसला अफजाई की। उन्होंने शिल्पग्राम का भ्रमण कर उत्सव का अवलोकन भी किया।

Related post