शिल्पग्राम उत्सव में लोक रंगों की बहार, ओडिशा के गोटीपुआ ने खींचा खास आकर्षण

 शिल्पग्राम उत्सव में लोक रंगों की बहार, ओडिशा के गोटीपुआ ने खींचा खास आकर्षण

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से आयोजित दस दिवसीय शिल्पग्राम उत्सव 2025 में देशभर की लोक कलाओं ने ‘लोक के रंग–लोक के संग’ की जीवंत छटा बिखेर दी है। उत्सव के चौथे दिन मुक्ताकाशी मंच पर महाराष्ट्र की अनूठी कर्ण ढोल (शब्द भेद) प्रस्तुति ने दर्शकों को चकित कर दिया, जब एक कलाकार आंखों पर पट्टी बांधकर सैकड़ों दर्शकों के बीच से केवल वाद्ययंत्र की धुन के सहारे नारियल खोज लाया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच इस अद्भुत हुनर की जमकर सराहना हुई।

देशभर की लोक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

मुख्य कार्यक्रम में गुजरात का गरबा, जम्मू का डोगरी लोक नृत्य जगरना, राजस्थान का नगाड़ा वादन, सहरिया आदिवासी संस्कृति पर आधारित सहरिया स्वांग और ग्रामीण संस्कृति का प्रतीक सफेद आंगी गेर ने दर्शकों को झुमाया। गोवा का देखनी, मणिपुर का लाई हारोबा, त्रिपुरा का संतुलनकारी होजागिरी और ओडिशा की जनजातीय संस्कृति को उकेरता संभलपुरी नृत्य भी खास आकर्षण रहे। महाराष्ट्र के मल्लखंभ के रोमांचक करतबों के साथ हरियाणा का घूमर और लोक देवता गोगाजी को समर्पित डेरू नृत्य को भी खूब सराहना मिली। कार्यक्रम का संचालन मोहिता दीक्षित और यश दीक्षित ने किया।

गोटीपुआ: भगवान जगन्नाथ को समर्पित नृत्य

उत्सव के विशेष आकर्षण के रूप में गुरुवार को मुक्ताकाशी मंच पर ओडिशा का गोटीपुआ नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। भगवान जगन्नाथ को समर्पित यह नृत्य ओडिशी शास्त्रीय नृत्य पर आधारित है। डांस ग्रुप के लीडर बसंत प्रधान के अनुसार, प्राचीन काल में यह सेवा देवदासियां करती थीं, लेकिन वर्ष 1509 ईस्वी के बाद यह परंपरा बदल गई और भगवान की सेवा का अधिकार केवल लड़कों को दिया गया। तब से युवक स्त्री वेश में नृत्य कर भगवान को रिझाते हैं।
‘गोटी’ का अर्थ ‘एक’ और ‘पुआ’ का अर्थ ‘लड़का’ है—इसी से गोटीपुआ शब्द बना। समय के साथ इसमें एक्रोबेटिक करतब जुड़े, लेकिन नर्तकों ने अभ्यास से अपनी लावण्यता और सौंदर्य बनाए रखा। वेशभूषा में साड़ी, ब्लाउज, उत्तरी, पंची, कूचो, धोतीनुमा पायजामा, दुल्हन जैसे आभूषण, घूंघरू और पैरों में आलता शामिल होता है।

कला प्रेमियों का उत्साह बना पहचान

उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान ने कहा कि उदयपुरवासियों का कला प्रेम इस उत्सव की पहचान बन चुका है। यही कारण है कि हर वर्ष उत्सव नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने बताया कि शिल्पग्राम प्रांगण में चार पद्म पुरस्कार प्राप्त सहित 15 नामचीन चित्रकारों का कला शिविर और मुक्ताकाशी मंच के पास चल रही कार्यशालाएं हर आयु वर्ग को आकर्षित कर रही हैं। कला शिविर का समापन गुरुवार को होगा।

‘हिवड़ा री हूक’ और थड़ों पर लोक संस्कृति

बंजारा मंच पर ‘हिवड़ा री हूक’ कार्यक्रम के तहत उभरती प्रतिभाओं को मंच मिल रहा है, वहीं प्रश्नोत्तरी और त्वरित उपहारों ने इसे और रोचक बना दिया। शिल्पग्राम के विभिन्न थड़ों पर सुबह 11 से शाम 6 बजे तक गवरी, चकरी, बाजीगर, घूमट, पोवाड़ा, मांगणियार गायन, मसक वादन, बीन-जोगी, कच्ची घोड़ी, कठपुतली और बहरूपिया कलाकारों ने मेलार्थियों का भरपूर मनोरंजन किया। पत्थर की मूर्तियां भी दर्शकों के लिए आकर्षण और सेल्फी पॉइंट बनी हुई हैं।

कल के खास आकर्षण

गुरुवार शाम मुक्ताकाशी मंच पर ओडिशा का गोटीपुआ, छत्तीसगढ़ का पंडवानी गायन, मणिपुर का पुंग ढोल चेलम और पश्चिम बंगाल का ऊर्जावान नटुआ लोक नृत्य विशेष आकर्षण रहेंगे। इसके साथ ही राजस्थान, गुजरात, जम्मू, गोवा, त्रिपुरा, हरियाणा और महाराष्ट्र की विविध लोक प्रस्तुतियां दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी।

शिल्पग्राम तक सिटी बस सेवा

शिल्पग्राम उत्सव के मद्देनजर नगर निगम ने उदयपुरवासियों की सुविधा के लिए सूरजपोल से शिल्पग्राम तक सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक हर आधे घंटे में सिटी बस सेवा शुरू की गई है। इस सेवा का लाभ उठा उदयपुरवासी शिल्पग्राम उत्सव देखने पहुंच सकते है। यह बस सेवा सूरजपोल से चेतक सर्कल, सहेलियों की बाड़ी, देवाली होते हुए शिल्पग्राम पहुंचेगी। वापसी में शिल्पग्राम से फतहसागर, चेतक सर्कल, देहलीगेट होते हुए सूरजपोल पहुंचेगी।

Related post