एमपीयूएटी ने रचा इतिहास: प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय जिसके पास अपना कम्युनिटी रेडियो स्टेशन

 एमपीयूएटी ने रचा इतिहास: प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय जिसके पास अपना कम्युनिटी रेडियो स्टेशन

उदयपुर, 09 अक्टूबर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) स्वयं का कम्युनिटी रेडियो स्टेशन आरंभ करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है। प्रसार शिक्षा निदेशालय परिसर में लगभग ढाई वर्ष में तैयार हुए इस रेडियो स्टेशन का लोकार्पण कुलगुरु डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक ने किया। अब आमजन एमपीयूएटी प्रताप रेडियो 90.4 एफ.एम. पर प्रतिदिन प्रसारित होने वाले कार्यक्रम सुन सकेंगे।

कम्युनिटी रेडियो पर विशेष रूप से उदयपुर जिले के सुदूरवर्ती आदिवासी क्षेत्रों के लिए किसानोपयोगी कार्यक्रम, फसलों में कीट-रोग नियंत्रण, पशुपालन, उद्यानिकी, शूकर पालन, खेती-बाड़ी के साथ-साथ मनोरंजन, शिक्षा और समाजोत्थान से जुड़े विविध कार्यक्रम प्रसारित किए जाएंगे।

समारोह में मुख्य अतिथि शहर विधायक श्री ताराचंद जैन ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में भी रेडियो अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। यह सस्ता, सुलभ और सार्वभौमिक माध्यम है, जो सूचना, शिक्षा और मनोरंजन को जन-जन तक पहुंचाता है। विशेषकर ऐसे समुदायों के लिए यह महत्वपूर्ण है, जहां इंटरनेट या बिजली की पहुंच नहीं है। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राजस्थान के किसानों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह कम्युनिटी रेडियो अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगा, जिससे वे कृषि एवं पशुपालन में हो रहे नवाचारों की जानकारी घर बैठे प्राप्त कर सकेंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु डॉ. कर्नाटक ने कहा कि बदलते दौर में रेडियो की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है, बल्कि आज के समय में शहरों में भी लोग इसे सुनना पसंद करते हैं। रेडियो तनाव दूर करने में सहायक है और कृषि के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता बनी हुई है। यह रेडियो स्टेशन किसानों की आय में वृद्धि और बच्चों के स्वस्थ मनोरंजन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार से कम्युनिटी रेडियो सेंटर स्थापित करने का परिपत्र मिलने के बाद प्रदेश के सभी पांच कृषि विश्वविद्यालयों ने आवेदन किया था, लेकिन सफलता केवल एमपीयूएटी को ही मिली। रेडियो स्टेशन की स्थापना के दौरान संचार एवं रक्षा मंत्रालय सहित कई विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना और वित्तीय व्यवस्थाएं जुटाना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे विश्वविद्यालय ने सफलतापूर्वक पूरा किया। अब इस रेडियो के माध्यम से किसानों को फसल प्रबंधन, कृषि उत्पादों के बाजार भाव और फसल बीमा जैसी जानकारियां नियमित रूप से मिलेंगी।

कभी शादी में रेडियो और साइकिल देने का प्रचलन था

विशिष्ट अतिथि निदेशक अनुसंधान डॉ. अरविंद वर्मा और पूर्व प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. आर.ए. कौशिक ने कहा कि यह कम्युनिटी रेडियो स्टेशन 25 किलोमीटर के परिक्षेत्र में सीमावर्ती गांवों तक अपनी पहुंच बनाएगा। उन्होंने कहा कि चार–पांच दशक पहले शादी में रेडियो और साइकिल देना प्रचलन में था। तब भी रेडियो का महत्व था और आज भी है। विश्वविद्यालय ने अग्रणी सोच रखते हुए किसानोपयोगी एक बड़ा कदम उठाया है। कृषि, पशुपालन, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान से जुड़े कार्यक्रम अब घर-घर तक पहुंचेंगे। साथ ही प्रसार शिक्षा को अनुसंधान से जोड़ते हुए यह कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

आरंभ में प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. आर.एल. सोनी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि कुलगुरु डॉ. कर्नाटक की दूरदृष्टि और कुशल नेतृत्व के कारण ही यह कम्युनिटी रेडियो स्टेशन स्थापित हो सका। स्टेशन में रिकार्डिंग रूम, एडिटिंग रूम और ऑन-एयर रूम पूरी तरह तैयार हैं, जहां पिछले दो माह से ट्रायल प्रसारण चल रहा था। इस दौरान कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, शिक्षा और समाजसेवा से जुड़े कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग कर उनका प्रसारण किया गया। अब नियमित कार्यक्रमों का प्रसारण प्रतिदिन होगा।

उद्घाटन समारोह में प्रसार शिक्षा निदेशालय के अधीन कार्यरत आठों कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रमुख एवं कृषि वैज्ञानिक — डॉ. योगेश कनोजिया, डॉ. सी.एम. यादव, डॉ. रतन लाल सोलंकी, डॉ. दीपा इंदोरिया, डॉ. सुनील जोशी, डॉ. लतिका व्यास, डॉ. सी.एम. बलाई, डॉ. बी.एस. भाटी, डॉ. बी.एल. रोत, डॉ. पी.सी. रेगर और डॉ. मनीराम सहित अन्य उपस्थित रहे। वल्लभनगर क्षेत्र की 40 से अधिक कृषि सखियां भी कार्यक्रम में शामिल हुईं।

संचालन प्रो. राजीव बैराठी ने किया। उन्होंने बताया कि एक सर्वे के अनुसार 98 प्रतिशत लोगों के पास रेडियो उपलब्ध है, जिसे घर से लेकर खेत तक सुना जा सकता है — जबकि टेलीविजन के साथ ऐसा संभव नहीं। इस अवसर पर रेडियो स्टेशन मैनेजर रश्मिधर दूबे और साउंड इंजीनियर अमरदीप नामदेव भी मौजूद रहे।


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