एमएलएसयू – ‘बिणजारो’ डॉक्यूमेंट्री की विशेष स्क्रीनिंग व कार्यशाला आयोजित

 एमएलएसयू  – ‘बिणजारो’ डॉक्यूमेंट्री की विशेष स्क्रीनिंग व कार्यशाला आयोजित

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग द्वारा राजस्थानी भाषा के उत्थान और साहित्यकार नागराज शर्मा के योगदान पर आधारित “बिणजारो” डॉक्यूमेंट्री फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग तथा फिल्म समालोचना पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शोधार्थियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर राजस्थानी भाषा और साहित्य के महत्व पर चर्चा की।

उद्घाटन सत्र में विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश सालवी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कुंदन माली ने राजस्थानी भाषा की प्राचीनता और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. भानुप्रिया रोहिला ने कहा कि अन्य भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है, लेकिन मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी भी हमारी ही है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अधिष्ठाता प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने कहा कि नई शिक्षा नीति में भी मातृभाषा के महत्व को स्वीकार किया गया है और हमें अपनी भाषा को सदैव सम्मान के साथ अपनाए रखना चाहिए।

कार्यशाला में डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक और फिल्मकार अरविंद चौधरी ने फिल्म निर्माण की प्रक्रिया, पटकथा लेखन, निर्देशन और अभिनय सहित फिल्म के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि फिल्म के जरिए संवेदना और सामाजिक संदेश को प्रभावी ढंग से कैसे प्रस्तुत किया जा सकता है।

“बिणजारो” डॉक्यूमेंट्री में राजस्थानी भाषा, ‘बिणजारो’ पत्रिका और साहित्यकार नागराज शर्मा की साहित्य साधना को रेखांकित किया गया है। फिल्म में जोधपुर के महाराजा गज सिंह, नंद भारद्वाज, राजवीर सिंह चळकोई, सीमा मिश्रा, शेर मोहम्मद, भारत ओला, संपत सरल, मनोज कुमार स्वामी, बुलाकी शर्मा और कमल रंगा सहित कई साहित्यकारों और कलाकारों ने राजस्थानी भाषा की महत्ता तथा उसकी संवैधानिक मान्यता की मांग को भी सामने रखा।

समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. नवीन नंदवाना ने की। उन्होंने कहा कि मातृभाषा ही संस्कारों की जननी है और हमें इसे बोलने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. लोकेश राठौर और जेठानंद पवार ने किया।

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