सुविवि- पत्रकारिता विभाग की ओर से कुलिश जन्मशताब्दी वर्ष पर संगोष्ठी का आयोजन


नैतिकता, साहस और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक थी कुलिश जी की पत्रकारिता
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक एवं राजस्थान की पत्रकारिता के युग-पुरुष कर्पूरचंद कुलिश की जन्मशताब्दी वर्ष (2025-2026) के अवसर पर मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से मंगलवार को संगोष्ठी का आयोजन किया। यह कार्यक्रम कुलिश जी के निर्भीक, सत्यनिष्ठ और जन-केंद्रित पत्रकारिता के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास था।
सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के पत्रकारिता विभाग सभागार में आयोजित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता राजस्थान पत्रिका के स्थानीय संपादक राजीव जैन ने की। उन्होंने कुलिश जी के जीवन-दर्शन और पत्रकारिता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुलिश जी ने पत्रकारिता को मात्र समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के अंतर्मन की आवाज और लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बनाने का काम किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में जब मीडिया पर कई चुनौतियां हैं, कुलिश जी का ‘सत्य की खोज और जनहित की रक्षा’ वाला सिद्धांत हर पत्रकार के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा।
मुख्य अतिथि के रूप में वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, उदयपुर की निदेशक प्रो. रश्मि बोहरा ने कहा कि कर्पूरचंद कुलिश ने राजस्थान की पत्रकारिता को न केवल मजबूत आधार दिया, बल्कि इसे नैतिकता, साहस और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनाया। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे कुलिश जी के जीवन से प्रेरणा लेकर पत्रकारिता को एक पवित्र व्यवसाय के रूप में अपनाएं, न कि केवल व्यापार के रूप में। प्रो. बोहरा ने कुलिश जी के दार्शनिक और साहित्यिक योगदान को भी रेखांकित किया, जिन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ वेद-विज्ञान और भारतीय संस्कृति पर गहन चिंतन किया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक गौरीकांत शर्मा ने कहा कि कुलिश जी ने पत्रकारिता के माध्यम से जन-जागरण का जो कार्य किया, वह आज भी प्रासंगिक है। सरकारी सूचना तंत्र और मीडिया के बीच संतुलित संबंध की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कुलिश जी के निर्भीक स्वभाव को याद किया।
विषय प्रवर्तन करते हुए पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कुंजन आचार्य ने कहा कि यह उनका सौभाग्य रहा कि उन्हें कुलिश जी के साथ काम करने का अवसर प्राप्त हुआ। कुलिश जी के साथ बिताए समय को याद करते हुए उनके द्वारा दिए गए प्रशिक्षण के संस्मरणों को साझा किया। आचार्य ने कहा कि उनकी कविताओं में गहरी रुचि है और कुलिश जी स्वयं अनुभवी कवि थे 90 के दशक में केसरगढ़ में राजस्थान पत्रिका में प्रशिक्षण के दौरान जब अपनी लिखी कविताएँ कुलिश जी को जँचवाते थे तो वे हमेशा प्रोत्साहन दिया करते थे।आचार्य ने कहा कि जब उनका पहला कविता संग्रह “एक टुकड़ा आसमान” छपकर आया तो कुलिश जी ने अपने हाथ से पत्र लिख कर बधाई प्रेषित की थी।
संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार विपिन गांधी ने कहा कि कर्पूरचंद कुलिश का जन्म 20 मार्च 1926 को हुआ था और उनकी जन्मशताब्दी वर्ष में ऐसे आयोजन न केवल स्मरण हैं, बल्कि वर्तमान पत्रकारिता के संकटों से निपटने के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं। राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. बालूदान बारहठ मैं उनके द्वारा शुरू किया गया और गाँव चले कॉलम का विस्तार से ज़िक्र किया। डॉ. विजय विप्लवी और डॉ. भारतभूषण ओझा ने कुलिश जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं—ग्रामीण पृष्ठभूमि से उठकर एक शक्तिशाली समाचार पत्र समूह खड़ा करने, आपातकाल में साहस दिखाने और पत्रकारिता को नैतिक आधार देने—पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में पत्रकारिता विभाग की छात्रा सिया पवार ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और उपस्थितजनों का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि कुलिश जी के विचार आज के युवा पत्रकारों के लिए प्रकाश-स्तंभ हैं और ऐसे आयोजन उन्हें दिशा प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ आशीष सिसोदिया, राजस्थानी विभाग के अध्यक्ष डा सुरेश सालवी के साथ ही डॉ नेहा कुमारी, डॉ कल्पना आचार्य भी उपस्थित थे।









