एक आदर्श लोक सेविका: स्वर्गीय डॉ. तरु सुराणा का जीवन-सार

 एक आदर्श लोक सेविका: स्वर्गीय डॉ. तरु सुराणा का जीवन-सार

डॉ. तरु सुराणा (RAS) को उनके स्वर्गीय प्रयाण की पहली तिथि 5 अक्टूबर 2025 पर सम्मानीय श्रद्धांजली

डॉ. तरु सुराणा का जीवन राजस्थान प्रशासनिक सेवा में निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता का एक जीवंत प्रतीक था। मात्र 14 वर्षों की सेवायात्रा में उन्होंने जो नैतिक ऊँचाइयाँ प्राप्त कीं, वह किसी दीर्घकालिक करियर से कम नहीं। उनकी प्रशासनिक कार्यशैली निष्कलंक ईमानदारी, अडिग सिद्धांतों और प्रत्येक वर्ग के प्रति करुणा से परिपूर्ण रही। उनका जीवन-मार्ग ईमानदारी, साहस और करुणा का ऐसा संगम था, जो आज के समय में अत्यंत दुर्लभ है।

उनकी कार्यशैली में जहाँ एक ओर प्रशासनिक दक्षता थी, वहीं दूसरी ओर मानवता की गहराई भी थी। वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से कभी नहीं डगमगाईं। उनका यह विश्वास था कि लोकसेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक पवित्र दायित्व है—जिसे ईमानदारी, पारदर्शिता और संवेदना के साथ निभाना चाहिए।

साहसिक निर्णय: जब सिद्धांतों को मिला महत्व

सन् 2019 में, जब उन्हें जिला आबकारी अधिकारी (Udaipur) के पद पर स्थानांतरित किया गया, तो उन्होंने यह पद ग्रहण नहीं किया क्योंकि वे शराब को एक सामाजिक बुराई मानती थीं। यह निर्णय उन्होंने अपने निजी मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों के अनुरूप लिया, लेकिन उनकी सत्यनिष्ठा और आस्था के सम्मान में उन्हें एक वैकल्पिक पद सौंपा गया, जो प्रशासनिक तंत्र में उनके प्रति सम्मान को दर्शाता है। यह घटना उनके चारित्रिक बल और नैतिक दृढ़ता की मिसाल है।

जन्म से सेवा तक — “तरु” जैसा जीवन

1 जुलाई को जन्मी डॉ. तरु को उनका नाम “तरु” (वृक्ष) इसी सोच के साथ दिया गया कि वे जीवनभर छाया और सहारा देने वाली बनेंगी। और उन्होंने सचमुच ऐसा ही जीवन जिया—मूल्यों में अडिग, व्यवहार में विनम्र और दूसरों के लिए सदा सहायक। वे जहाँ भी गईं, अपने मधुर व्यवहार, कर्तव्यनिष्ठा और संवेदनशीलता के कारण सबके हृदय में बस गईं।

विशिष्ट उपलब्धियाँ और सेवाएँ

डॉ. तरु सुराणा उदयपुर क्षेत्र की अब तक की एकमात्र महिला हैं जिन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा में महिला वर्ग में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।

सन् 2008 में उन्होंने राजस्थान पुलिस सेवा एवं लेखा सेवा जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में भी चयन प्राप्त किया था, लेकिन उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग को चुना क्योंकि उनका उद्देश्य सच्चे अर्थों में समाज की कमजोर एवं वंचित महिलाओं और बच्चों की सेवा करना था।

यह निर्णय पद की प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि सेवा के उद्देश्य से प्रेरित था—जो राजस्थान लोकसेवा आयोग के इतिहास में एक दुर्लभ उदाहरण है।

प्रमुख पदस्थापनाएँ और ज़िम्मेदारियाँ

डॉ. तरु सुराणा ने विभिन्न ज़िम्मेदारियों का निर्वहन बड़ी कुशलता और निष्ठा से किया: सहायक कलेक्टर, राजसमंद,
उपखंड अधिकारी (एसडीएम), आमेट राजसमंद,उपखंड अधिकारी (एसडीएम), गढ़ी – बाँसवाड़ा,उपखंड अधिकारी (एसडीएम), रेलमगरा – राजसमंद, भूमि अधिग्रहण अधिकारी (LAO), नगर सुधार न्यास – उदयपुर
उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग – उदयपुर,वरिष्ठ प्रबंधक / कार्यकारी निदेशक, राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) – उदयपुर,निदेशक, जनजातीय अनुसंधान संस्थान – उदयपुर,उप महानिरीक्षक (DIG), पंजीयन एवं मुद्रांक – उदयपुर

एक प्रकाश जो अब भी प्रेरित करता है

5 अक्टूबर 2024 को मात्र 42 वर्ष की आयु में जब उनका असामयिक निधन हुआ, तो न केवल राजस्थान प्रशासनिक सेवा बल्कि समाज के हर वर्ग ने एक ऐसी प्रेरणा को खो दिया जिसकी पूर्ति कठिन है। उनका जीवन यह सिखाता है कि जब सेवा में ईमानदारी, संवेदनशीलता और साहस का समावेश होता है, तो वह केवल प्रशासन नहीं, बल्कि समाज के हर कोने को रोशन करता है।

शैक्षणिक उत्कृष्टता की प्रतीक

डॉ. सुराणा की सम्पूर्ण शिक्षा उदयपुर में ही हुई—
विद्या भवन, सेंट मैरीज़ कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बी.एन. कॉलेज, मीरा गर्ल्स कॉलेज और मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से।

उनकी प्रमुख शैक्षणिक उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं:

यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण, आईसीएसएसआर (ICSSR) फेलोशिप प्राप्त कर समाजशास्त्र में पीएच.डी.,एम.ए. समाजशास्त्र में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान, स्वर्ण पदक प्राप्त, सीबीएसई 12वीं कक्षा में क्षेत्रीय स्तर पर विषयों में प्रथम स्थान,महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन द्वारा ‘महाराणा फतह सिंह अवॉर्ड’ से सम्मानित,ASCI, हैदराबाद से प्रबंधन में उच्च प्रशिक्षण, स्कूल में हाऊस कैपटेन , कॉलेज छात्रसंघ में संयुक्त सचिव, प्रखर वाद-विवाद वक्ता

उन्होंने 20 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में समाजशास्त्र पर शोधपत्र प्रस्तुत किए और शिक्षा व नीति-निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया।

एक वृक्ष के समान, जैसा कि उनके नाम ‘तरु’ का अर्थ है, उन्होंने ईमानदारी से सिर ऊँचा रखा, विनम्रता से जमीन से जुड़ी रही और छाया से सबको सकून दिया ।

एक प्रकाश जो बहुत जल्दी खो गया, लेकिन हमेशा के लिए प्रकाशित रहेगा

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