मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ‘सबका साथ-सबका विकास’ की भावना से जनजातीय अंचलों का व्यापक उत्थान


राजस्थान का समावेशी विकास मॉडल जनजाति सशक्तिकरण की नई इबारत लिख रहा है
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास की भावना के साथ कार्य करते हुए प्रदेश के जनजातीय अंचलों के उत्थान के लिए कृतसंकल्प है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समावेशी और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने की दिशा में राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए ठोस नीतियां और योजनाएं बनाकर उन्हें प्रभावी रूप से लागू किया है। राज्य का जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, जल प्रबंधन, रोजगार और संस्कृति संरक्षण के क्षेत्रों में समावेशी विकास के मूल मंत्र के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की विचारधारा “अपनी भूमि, अपनी संस्कृति और अपने अधिकारों की रक्षा” राज्य सरकार की नीतियों में साकार हो रही है।
जनजाति क्षेत्रों के विकास के लिए टीएसपी फंड में डेढ़ गुना वृद्धि
राज्य सरकार ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के उत्थान के लिए टीएसपी फंड को 1,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये किया है। साथ ही, सामुदायिक वनाधिकार क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित गोविंद गुरू जनजाति क्षेत्रीय विकास योजना प्रारंभ की गई है। देवला-कोटड़ा (उदयपुर) और जसवंतपुरा (जालोर) में नए आवासीय विद्यालय तथा शाहबाद (बारा) में सहरिया जनजाति खेल अकादमी की स्थापना की जा रही है। आदिवासी बच्चों के पोषण और उन्हें घर के निकट प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 250 नए मां-बाड़ी केंद्रों की स्थापना प्रक्रियाधीन है। इन केंद्रों में कार्यरत शिक्षाकर्मियों, महिला सहयोगिनियों और स्वास्थ्यकर्मियों के मानदेय में वित्तीय वर्ष 2025-26 से 10 प्रतिशत वृद्धि की गई है।
शिक्षा क्षेत्र में मजबूती और कौशल विकास से युवाओं को सशक्त बनाना
राज्य सरकार आदिवासी युवाओं को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास के अवसर प्रदान कर रही है। राज्य के 446 आश्रम छात्रावासों में लगभग 25 हजार विद्यार्थी निःशुल्क आवास, भोजन और अध्ययन की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं। विभागीय छात्रावासों व आवासीय विद्यालयों में मेस भत्ता वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3,000 रुपये से बढ़ाकर 3,250 रुपये प्रतिमाह किया गया है।
राज्य के 23 आवासीय विद्यालयों में 3,800 से अधिक विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि उदयपुर के ढीकली और डूंगरपुर के सूरपुर स्थित मॉडल पब्लिक रेजिडेंशियल स्कूल शिक्षा में उत्कृष्टता के नए केंद्र बन चुके हैं।
प्रदेश के 30 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों में लगभग 10 हजार विद्यार्थी आधुनिक शिक्षण पद्धति, डिजिटल लर्निंग और खेल सुविधाओं के साथ अध्ययनरत हैं। मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के तहत 8 बहुउद्देशीय छात्रावासों में 878 छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग और आवास सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
कौशल विकास के क्षेत्र में राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम, सीपेट जयपुर और आईडीटीआर रेलमगरा जैसे संस्थानों के माध्यम से हजारों युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अशोक लीलैंड प्रशिक्षण केंद्र, रेलमगरा में 25 युवाओं को भारी वाहन चलाने का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया है।
खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए ठोस पहल
राज्य के युवा शिक्षा के साथ खेलकूद में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। 13 खेल अकादमियों में 895 छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार ने खिलाड़ियों के हित में खेल छात्रावासों में मैस भत्ता बढ़ाकर 4,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। प्रशिक्षकों की नियुक्ति, उपकरण आपूर्ति और प्रतियोगिताओं के आयोजन को प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य स्तरीय एकलव्य विद्यालय सांस्कृतिक प्रतियोगिता में प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें से चार विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त किया।
जल संरक्षण में जनसहभागिता से नई दिशा
जनजातीय अंचलों में जलोत्थान योजनाएं, एनिकट निर्माण, नहर सुदृढ़ीकरण और जल संरचना पुनरोद्धार कार्य जल सुरक्षा की दिशा में मिसाल बने हैं। जनजाति भागीदारी योजना के तहत विद्यालय, सड़क, पेयजल और सामुदायिक भवन निर्माण कार्यों में न्यूनतम 30 प्रतिशत जनसहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री का मानना है कि “सच्चा विकास वही है, जिसमें समाज भी भागीदार बने”, यही दृष्टिकोण इन योजनाओं में स्पष्ट झलकता है।
जनजाति नायकों के गौरव की पुनर्स्थापना
राज्य सरकार प्राचीन विरासत और संस्कृति के संरक्षण के साथ जनजाति नायकों के गौरव की पुनर्स्थापना पर भी कार्य कर रही है। डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर में जनजाति नायकों के स्मारक तथा वीर बालिका काली बाई संग्रहालय के निर्माण हेतु 25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। सीताबाड़ी, कमलनाथ महादेव और जावर माता मंदिर जैसे आस्था स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
भारत सरकार की पीएम-जनमन योजना अंतर्गत बारां जिले के सहरिया क्षेत्र में 17 मल्टी परपज केंद्रों का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है, जिनमें से 8 केंद्रों का कार्य पूर्ण हो चुका है। स्वच्छ परियोजना के तहत 4,560 स्वास्थ्यकर्मी टीबी मुक्त भारत मिशन और सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण में सक्रिय हैं।
नवाचारों से सर्वांगीण विकास की दिशा
जनजाति क्षेत्रों में नवाचारों के माध्यम से विकास की नई मिसालें स्थापित हो रही हैं। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और इसरो के संयुक्त तत्वावधान में जयकार प्रोग्राम के तहत उदयपुर के ईएमआरएस विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष विज्ञान प्रशिक्षण प्राप्त किया। माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान में स्थापित बनफूल डिज़ाइन स्टूडियो जनजातीय कला संरक्षण और विपणन में नई दिशा दे रहा है। प्रोजेक्ट चितेरा के माध्यम से छात्रावासों और विद्यालयों में मांडना व पारंपरिक चित्रकला को पुनर्जीवित किया गया है। आबूरोड (सिरोही) में एम्स जोधपुर के सहयोग से सैटेलाइट सेंटर फॉर ट्राइबल हेल्थ एंड रिसर्च की स्थापना हुई, जहां प्रधानमंत्री ने 29 अक्टूबर 2024 को ड्रोन दवा आपूर्ति सुविधा का शुभारंभ किया।
अमृत कलश योजना बनी सामुदायिक भागीदारी की नई पहल
सीएसआर और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी से विभाग ने अमृत कलश योजना प्रारंभ की है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को आईआईएम उदयपुर, आईआईटी जोधपुर, एनएलयू और केवीके जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का भ्रमण कराया गया। मैजिक बस इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से 25 जिलों के 43 विद्यालयों और 450 छात्रावासों में जीवन कौशल प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ है। माई मिशन कार्यक्रम के तहत 40 विद्यार्थियों को राजस्थान सिविल सेवा परीक्षा 2024 की निःशुल्क कोचिंग दी गई है।
आरएसएमएम लिमिटेड के सीएसआर सहयोग से जनजाति खिलाड़ियों की लैक्रॉस टीम इंडिया ने उज्बेकिस्तान में एशियाई प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। तृतीय राष्ट्रीय लैक्रॉस चैंपियनशिप 2025-26 में राज्य के जनजातीय 55 खिलाड़ियों ने 6 वर्गों में 5 स्वर्ण और 1 कांस्य पदक प्राप्त किए।
यूएनएफपीए की साझेदारी में संचार सेतु वर्चुअल लर्निंग प्लेटफॉर्म प्रारंभ किया गया है। एक वृक्ष प्रति वर्ष और हमारा कक्ष–हमारा वृक्ष अभियानों से पर्यावरण संरक्षण की भावना को बल मिला है।
उत्कृष्ट कार्य करने वालों को किया जा रहा सम्मानित
जनजाति क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जा रहा है। 4 अक्टूबर 2024 को आदि-गौरव सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षा, कला, खेल एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 17 व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया। 15 नवम्बर 2024 को बांसवाड़ा में आयोजित बिरसा मुंडा 150वीं जयंती समारोह के अंतर्गत “नववादी-युगधारा प्रणेता समागम” विषय पर 27 जनजाति नायकों को सम्मानित किया गया, जो जनजाति समाज की नई चेतना का प्रतीक है।
फोटो क्रेडिट – फर्स्ट इंडिया









