भूपाल नोबल्स संस्थान का 104वां स्थापना दिवस भव्य रूप से संपन्न


शिक्षा राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार, शिक्षक उसकी रीढ़ – रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
भूपाल नोबल्स विद्या प्रचारिणी सभा का 104वां स्थापना दिवस शुक्रवार को गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समारोह के मुख्य अतिथि भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रहे। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा, शिक्षक, नई शिक्षा नीति, आत्मनिर्भर भारत और भारतीय ज्ञान परंपरा पर गहन विचार साझा किए।
रक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और भविष्य की पीढ़ियों के निर्माण का सशक्त आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा वही सार्थक है जो मानवीय मूल्यों, दायित्वबोध और विवेक का विकास करे। विवेकयुक्त ज्ञान ही कल्याणकारी होता है, अन्यथा वही ज्ञान विनाश का कारण बन सकता है।
शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की नींव
राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी शिक्षा व्यवस्था की मजबूती का आधार शिक्षक होते हैं। इतिहास गवाह है कि शिक्षकों ने समाज में बड़े परिवर्तन की नींव रखी है। शिक्षक को सम्मान देने से ही शिक्षा विकास का पर्याय बनती है।


अहंकार मुक्त मन से ही सच्ची सफलता
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि मनुष्य अपने शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से पहचान बनाता है। अहंकार से मुक्त मन ही सच्ची सफलता, आनंद और परमानंद की ओर ले जाता है।
नई शिक्षा नीति: परंपरा और आधुनिकता का संतुलन
राजनाथ सिंह ने नई शिक्षा नीति–2020 को भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के साथ आधुनिक शिक्षा का संतुलित संगम बताया। उन्होंने कहा कि मल्टीडिसिप्लिनरी और इंटरडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण से ऐसी पीढ़ी तैयार होगी जो विचारशील, संवेदनशील और चरित्रवान होगी तथा समाज की जटिल समस्याओं का समाधान कर सकेगी।
आत्मनिर्भर भारत में शिक्षण संस्थानों की भूमिका
रक्षा मंत्री ने कहा कि स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य को श्रेष्ठ बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक होता है। भूपाल नोबल्स संस्थान विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है, जो आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान है।
सैनिक स्कूल स्थापना का मार्ग प्रशस्त
समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने भूपाल नोबल्स संस्थान में सैनिक स्कूल खोलने के आवेदन पर सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि प्रस्तुत सभी प्रारूप सही पाए गए हैं और वे व्यक्तिगत स्तर पर इस दिशा में पूरा प्रयास करेंगे।


महाराणा भूपाल सिंह को किया नमन
समारोह से पूर्व रक्षा मंत्री ने संस्थान परिसर में महाराणा भूपाल सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में महाराणा भूपाल सिंह के योगदान, राष्ट्रभक्ति और दूरदर्शिता को स्मरण किया।
चौथी औद्योगिक क्रांति और शिक्षा
रक्षा मंत्री ने तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अनुसंधान के युग में नवाचार को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि इनोवेशन के सह-निर्माता हैं।
सम्मान और उपलब्धियाँ


लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
संस्थान के विकास में योगदान के लिए 102 वर्षीय उदय सिंह पुरावत सहित तेज सिंह शक्तावत, रावत मनोहर सिंह कृष्णावत, गुणवंत सिंह झाला, प्रदीप सिंह सांगावत, कृष्ण सिंह सारंगदेवोत, चंद्रगुप्त सिंह चौहान एवं लाल सिंह झाला को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। रक्षा मंत्री ने 102 वर्षीय सम्मानित विभूति सहित अन्य पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित करने के लिए मंच से स्वयं नीचे उतरकर उनका अभिनंदन किया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा।
बीएन प्राइड अवॉर्ड
खेलों में विशिष्ट उपलब्धियों के लिए कार्तिकी सिंह शक्तावत और अपूर्वी चंदेला को बीएन प्राइड अवॉर्ड प्रदान किया गया।


फतह आर्ट गैलरी का लोकार्पण
रक्षा मंत्री एवं अतिथियों द्वारा प्रशासनिक भवन में निर्मित फतह आर्ट गैलरी का लोकार्पण किया गया, जिसमें फतह सिंह से संबंधित ऐतिहासिक चित्र एवं दस्तावेज प्रदर्शित हैं।


अन्य प्रमुख वक्तव्य
कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने बदलते युद्ध स्वरूप, साइबर सुरक्षा और एआई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
प्रधान संरक्षक एवं अध्यक्ष महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ ने संस्थान की स्थापना में महाराणा भूपाल सिंह के योगदान को रेखांकित किया।
विशिष्ट अतिथियों सांसद मन्नालाल रावत, सी.पी. जोशी और शिक्षाविद अनिल सिंह ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका को अहम बताया।
समारोह से पूर्व देश में अमन-शांति के लिए हवन-पूजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिता राठौड़ ने किया तथा आभार मोहब्बत सिंह रूपाखेड़ी ने व्यक्त किया। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, गणमान्य नागरिक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।









