उदयपुर में हाई कोर्ट बेंच की मांग फिर बनी आंदोलन की आग

 उदयपुर में हाई कोर्ट बेंच की मांग फिर बनी आंदोलन की आग

वकीलों ने सरकार को दी निर्णायक संघर्ष की चेतावनी

उदयपुर बार एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी के गठन के साथ ही हाई कोर्ट बेंच की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर उबाल पर आ गई है।

मेवाड़-वागड़ हाई कोर्ट बेंच संघर्ष समिति के नेतृत्व में बुधवार को उदयपुर कोर्ट परिसर के बाहर अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया और धरने पर बैठकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया। दशकों से लंबित इस मांग को लेकर वकीलों का आक्रोश इस कदर तीखा था कि उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा— “मेवाड़ की धरती अब और इंतजार नहीं करेगी।”

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र जैन ने नेताओं के खोखले आश्वासनों पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि पिछले चार दशकों से उदयपुर के साथ केवल छल हुआ है। हर चुनाव में नेता वादों का झुनझुना थमाते हैं और फिर जनता को भूल जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि इस बार अधिवक्ता किसी भी झूठे आश्वासन पर धरना समाप्त नहीं करेंगे। अब आंदोलन का एकमात्र लक्ष्य उदयपुर में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना है।

प्रदर्शन में शामिल वकीलों और संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि न्याय के लिए जोधपुर तक की लंबी और खर्चीली दूरी तय करना मेवाड़-वागड़ के आदिवासी और गरीब वर्ग के साथ अन्याय है। यह लड़ाई सिर्फ अधिवक्ताओं की नहीं, बल्कि पूरे संभाग की जनता के अधिकारों की लड़ाई है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अब भी गंभीरता नहीं दिखाई, तो यह आंदोलन पूरे क्षेत्र में व्यापक रूप लेगा और आने वाले समय में इसके राजनीतिक परिणाम भी सामने आएंगे। मेवाड़ का अधिवक्ता वर्ग अब अपने हक के लिए सड़कों पर निर्णायक संघर्ष को तैयार नजर आ रहा है।

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