पीड़ित और जरूरतमंद को सस्ता व सुलभ न्याय दिलाने के हों प्रयास: देवनानी


राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी शनिवार को उदयपुर प्रवास पर रहे। इस दौरान वे आरएनटी मेडिकल कॉलेज के न्यू ऑडिटोरियम में आयोजित उदयपुर बार एसोसिएशन की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अधिवक्ताओं से आह्वान किया कि वे न्याय व्यवस्था में जनविश्वास को मजबूत करने के लिए शुचिता, सौहार्द और संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए पीड़ित एवं जरूरतमंद वर्ग को सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के प्रयास करें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री ज्ञानप्रकाश गुप्ता ने की। विशिष्ट अतिथियों में उदयपुर शहर विधायक श्री ताराचंद जैन, राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य जस्टिस रामचंद्रसिंह झाला तथा अतिरिक्त महाधिवक्ता डॉ. प्रवीण खंडेलवाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
समारोह में निवर्तमान अध्यक्ष श्री चंद्रभानसिंह शक्तावत, महासचिव श्री महावीरप्रसाद शर्मा, नव निर्वाचित अध्यक्ष श्री जितेंद्र जैन, महासचिव श्री लोकेश गुर्जर सहित पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। बार एसोसिएशन की परंपरा के अनुसार निवर्तमान अध्यक्ष श्री शक्तावत ने नवीन अध्यक्ष श्री जैन को शपथ दिलाई, जबकि अध्यक्ष श्री जैन ने महासचिव सहित कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई।
आज़ादी की लड़ाई से संविधान निर्माण तक अधिवक्ताओं की भूमिका
अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है। मनुस्मृति और कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी न्याय व्यवस्था के स्पष्ट उल्लेख मिलते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अधिवक्ताओं का योगदान अतुलनीय रहा है। महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, लाला लाजपत राय, चक्रवर्ती राजगोपालाचार्य एवं चितरंजन दास जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी पेशे से अधिवक्ता थे। आज़ादी के बाद संविधान निर्माण में भी अधिवक्ताओं की निर्णायक भूमिका रही।
मुकदमा जीतने से ऊपर न्याय की सुनिश्चितता
श्री देवनानी ने कहा कि अधिवक्ता का लक्ष्य केवल अपने मुवक्किल के पक्ष में मुकदमा जीतना नहीं होना चाहिए, बल्कि न्याय की सुनिश्चितता सर्वोपरि होनी चाहिए। कानून पर समाज का विश्वास बनाए रखना शासन-प्रशासन के साथ-साथ बेंच और बार की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ताओं से युवा वकीलों को प्रेरित व संस्कारित करने का आह्वान किया।
पारदर्शिता से सशक्त हो रही न्याय व्यवस्था
उन्होंने कहा कि न्याय की देवी की आंखों पर प्रतीकात्मक पट्टी थी, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हटाया है। इससे न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता का भाव और अधिक सुदृढ़ हुआ है।
हाईकोर्ट बेंच की मांग पर सेतु बनने का आश्वासन
कार्यक्रम के दौरान बार एसोसिएशन पदाधिकारियों ने उदयपुर में हाईकोर्ट बेंच की लंबित मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष से सहयोग की अपील की। इस पर श्री देवनानी ने आश्वासन दिया कि बार प्रतिनिधिमंडल के जयपुर पहुंचने पर वे मुख्यमंत्री, कानून मंत्री सहित संबंधित अधिकारियों से मुलाकात में सेतु की भूमिका निभाएंगे और स्वयं भी इस मांग के समर्थन में प्रयास करेंगे।







