जनजातीय गौरव वर्ष के तहत धरती आबा योजना में हुईं महत्वपूर्ण गतिविधियाँ


जनजातीय गौरव वर्ष और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत जिले के 14 ब्लॉकों एवं 101 वन धन विकास केंद्रों पर विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदाय को आजीविका संवर्द्धन और वित्तीय समावेशन के माध्यम से सशक्त बनाना रहा।
इस अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा के जीवन परिचय, रंगोली प्रतियोगिता, रैली, स्वयं सहायता समूहों के गठन, तथा राजीविका और अन्य योजनाओं की जानकारी से जुड़ी गतिविधियाँ आयोजित की गईं। राजीविका (राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद) के माध्यम से वन धन विकास केंद्रों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित हुआ।
कार्यक्रम में उपस्थित जनजातीय समुदाय के सदस्यों को लघु वनोपज के संग्रहण, मूल्य संवर्द्धन और विपणन के प्रभावी तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। इस पहल से स्थानीय निवासियों को वन उत्पादों से स्थायी आय प्राप्त करने और उन्हें उद्यमी बनाने में सहायता मिलेगी।
साथ ही, केंद्रों पर स्वयं सहायता समूहों के गठन के लिए बैठकें आयोजित की गईं, जिनके माध्यम से स्थानीय महिलाएँ और पुरुष संगठित होकर सामूहिक आर्थिक गतिविधियाँ संचालित करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वयं सहायता समूहों का गठन और उनका वन धन विकास केंद्रों से जुड़ाव, जनजातीय आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह पहल ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के लक्ष्य — अंतिम हितग्राही तक व्यक्तिगत अधिकारों की पूर्ति — को साकार करेगी।
ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से जनजातीय समाज को सरकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और वे आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर होंगे। इस शिविर के माध्यम से लगभग 4,783 स्वयं सहायता समूहों के सदस्य लाभान्वित हुए।









