सुविवि में आत्मनिर्भर भारत के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम पर ज्ञानवर्धक सत्र

 सुविवि में आत्मनिर्भर भारत के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम पर ज्ञानवर्धक सत्र

एंटरप्रेन्योरशिप यानी उद्यमिता। कई लोग मुझसे पूछते हैं कि उद्यमिता की सबसे बड़ी कमी क्या है। मेरा एक ही जवाब होता है — शुरुआत करने की। हमारे पास आइडिया है, लॉजिक है और वह सब कुछ है जिसकी एंटरप्रेन्योरशिप में महत्ती आवश्यकता होती है, लेकिन सिर्फ शुरुआत करने का स्पार्क नहीं होता। यही कारण है कि दिशा में लाखों रुपये जो सरकार की विभिन्न योजनाओं में प्राप्त होते हैं, उन्हें वापस रिफंड करना पड़ता है। यह जानकारी नई दिल्ली की डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इन प्रैक्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह ने दी।

अवसर था एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेल की अगुवाई में फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज तथा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के साझे में आत्मनिर्भर भारत के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम पर आयोजित पैनल डिस्कशन का। कार्यक्रम में एंटरप्रेन्योरशिप एक्सपर्ट डॉ. आभा शुक्ला, नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रगतिसिंह, आईईटी के निदेशक प्रो. हनुमान प्रसाद, एफएमएस की डायरेक्टर प्रो. मीरा माथुर, नोडल ऑफिसर डॉ. अविनाश पंवार तथा एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेल के को-कोऑर्डिनेटर डॉ. सचिन गुप्ता उपस्थित थे।

निदेशक प्रो. हनुमान प्रसाद ने कहा कि आज की दुनिया में उद्यमिता केवल एक व्यवसाय शुरू करने का साधन नहीं रही, बल्कि यह एक सोच, एक दृष्टिकोण और आत्मनिर्भरता की राह बन चुकी है। भारत में युवा अब नौकरी खोजने के बजाय नौकरी देने वाले बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कई ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं, जहां युवाओं ने अपनी मेहनत, लगन और नवाचार की सोच से समाज में नई मिसाल कायम की है।

एक्सपर्ट बोले… सफलता बड़े निवेश से नहीं, बल्कि बड़े विचार से
पैनल डिस्कशन में उपस्थित विशेषज्ञों ने उदाहरण देते हुए बताया कि इंदौर के रोहित वर्मा ने छोटे किसानों के लिए एक मोबाइल ऐप बनाया, जिससे वे सीधे ग्राहकों से जुड़ सकें। कुछ महीनों में ही यह ऐप हजारों किसानों की रोजगार की कड़ी बन गया। इस कहानी से यही संदेश मिलता है कि सफलता किसी बड़े निवेश से नहीं, बल्कि बड़े विचार से शुरू होती है।

अगर आपके पास एक नया विचार, जुनून और मेहनत करने की हिम्मत है, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं। सरकार भी स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दे रही है। आज का भारत उद्यमियों का भारत बन रहा है, जहां हर सपना हकीकत में बदलने की ताकत रखता है। सीख देते हुए कहा गया कि जो जोखिम उठाने की हिम्मत रखता है, वही इतिहास रचता है।

कार्यक्रम में डॉ. हिमानी पालीवाल, डॉ. जयपाल सिंह राठौड़, प्रफुल्ल कोठारी, विमला डांगी आदि उपस्थित थे।

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