विश्व स्ट्रोक दिवस पर सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यशालास्ट्रोक जैसे मामलों में वरदान साबित हो सकता है ‘सेतु’ – प्रो. माथुर


विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर आरएनटी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी विभाग के तत्वावधान में सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विपिन माथुर थे, जबकि अध्यक्षता न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. तरुण रलोट ने की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. तरुण रलोट ने अतिथियों का स्वागत किया और स्ट्रोक के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में स्ट्रोक के मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, इसलिए इस विषय पर चर्चा और जानकारी का प्रसार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से चिकित्सकों को अपडेट रखने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई है। डॉ. रलोट ने स्ट्रोक के कारणों, लक्षणों और उपचार के तरीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला।


मुख्य अतिथि प्राचार्य प्रो. विपिन माथुर ने कहा कि भारत में स्ट्रोक के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और इसमें समय का बहुत बड़ा महत्व होता है। इसी कारण इस वर्ष की थीम “हर मिनट उपयोगी है” रखी गई है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के दौरान मरीज का तुरंत अस्पताल पहुंचना और समय पर इलाज मिलना अत्यंत आवश्यक है। लेकिन, अधिकांश मामलों में मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते, जिससे स्थिति ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर समस्या तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में आरएनटी मेडिकल कॉलेज और एमबी अस्पताल का “ब्रिजिंग रेफरल सिस्टम – सेतु” मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकता है। उन्होंने चिकित्सकों से अपील की कि वे स्ट्रोक के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाएं और मरीजों को शीघ्र उपचार हेतु अस्पताल पहुंचाने में सहयोग करें।
कार्यशाला के दौरान डॉ. मयंक चौधरी ने स्ट्रोक में सीटी एवं एमआरआई की भूमिका पर, डॉ. गौरव जायसवाल ने गोल्डन ऑवर में मस्तिष्क सर्जरी की भूमिका पर, तथा डॉ. सावन शुक्ला और डॉ. शालिनी ने क्रमशः ब्रेन हेमरेज एवं ब्रेन डेथ विषय पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर डॉ. ईशा शुक्ला द्वारा स्ट्रोक विषय पर क्विज़ प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें डॉ. नेहा जैन, डॉ. आकाश और डॉ. साजिद विजेता रहे। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. शुभम एवं वरिष्ठ तकनीकी सहायक राकेश राठौड़ ने किया। कार्यशाला में ग्रामीण क्षेत्रों से आए चिकित्सा अधिकारियों, फिजीशियनों और रेजिडेंट डॉक्टरों सहित अनेक प्रतिभागियों ने भाग लिया।









