मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय का 33वां दीक्षान्त समारोह संपन्न


“विद्यार्थी सदा सत्य, धर्म और मानवता के मार्ग पर चले, शिक्षा से ही गरीबी का अंत संभव” – राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े
“यह केवल डिग्री वितरण नहीं, गुरु, अभिभावक और संस्थान के सामूहिक समर्पण का परिणाम है”- पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया
राज्यपाल श्री बागड़े ने विभिन्न संकायों के 255 शोधार्थियों को पीएचडी की डिग्री एवं 109 विद्यार्थियों को प्रदान किए स्वर्ण पदक
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय का 33वां दीक्षांत समारोह रविवार को आरएनटी मेडिकल कॉलेज सभागार में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह में विभिन्न संकायों के 255 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि एवं 109 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ किसनराव बागडे द्वारा प्रदान किए गए। इस अवसर पर फार्मेसी विभाग के नवनिर्मित ब्लॉक का लोकार्पण भी किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल बागडे ने कहा कि प्राचीन काल में गुरु और शिष्य परिवार के सदस्य होते थे, जिससे विद्यार्थी का सतत मूल्यांकन संभव होता था। उन्होंने विद्यार्थियों से सत्य के मार्ग पर चलने, धर्म का पालन करने और मानवता की भलाई के लिए कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, जबकि शिक्षा ही गरीबी दूर करने का सबसे सशक्त माध्यम है। एक शिक्षित व्यक्ति पूरे परिवार और पीढ़ी का भविष्य संवार सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि मेवाड़ का इतिहास शौर्य, मर्यादा और संस्कारों से भरा है। शिक्षा में जीवन मूल्यों और संस्कारों का समावेश आवश्यक है, तभी अच्छे नागरिकों का निर्माण संभव है। विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में आगे लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
डिग्री नहीं, मूल्यों का निर्माण है दीक्षांत समारोह: कटारिया
दीक्षांत संबोधन में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थी के निर्माण में शिक्षक, अभिभावक और संस्थान के सामूहिक समर्पण का प्रतीक है। गुरु की कृपा से ही व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ता है और गुरु का सम्मान सदैव बना रहता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सर्वाधिक स्वर्ण पदक और पीएचडी बालिकाओं को प्राप्त हुई हैं, जो समाज की सकारात्मक दिशा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का विकास भी है। व्यक्ति पैकेज से नहीं, बल्कि अपने संस्कारों और मूल्यों से महान बनता है। उन्होंने विकसित भारत मिशन-2047 में योगदान देने का आह्वान किया।


राज्य सरकार उच्च शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध: बैरवा
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। नीतिगत निर्णयों के माध्यम से संसाधनों की कमी दूर की जा रही है तथा मात्रात्मक के साथ-साथ गुणात्मक सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में मूल्य चेतना का होना अनिवार्य है और शिक्षक अपने आचरण से विद्यार्थियों के लिए आदर्श बनें।
अवसर खोजने वाले नहीं, अवसर सृजित करने वाले बनें: बाघमार
सार्वजनिक निर्माण तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री प्रो. मंजू बाघमार ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अवसर खोजने वाले नहीं, बल्कि अवसर सृजित करने वाले बनें। शिक्षित और आत्मनिर्भर बेटियां विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
इससे पूर्व कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों एवं प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
ये रहे मौजूद
समारोह में उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी, गोगुंदा विधायक प्रताप गमेती सहित विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष, शैक्षणिक स्टाफ, छात्र-छात्राएं एवं उनके परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।









