धड़कनों का शहर, सुरों का ठिकाना: उदयपुर में संगीत संग्रहालय की मांग

 धड़कनों का शहर, सुरों का ठिकाना: उदयपुर में संगीत संग्रहालय की मांग

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर की संगीत विरासत को स्थायी मंच देने के उद्देश्य से ‘सुरों की मंडली’ के सदस्यों ने जिला कलेक्टर श्री नमित मेहता से मुलाकात की।

संस्था के संस्थापक मुकेश माधवानी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें उदयपुर में ‘संगीत संग्रहालय’ स्थापित करने का विनम्र अनुरोध किया गया।

ज्ञापन में संग्रहालय की आवश्यकता पर ज़ोर

संस्थापक मुकेश माधवानी ने बताया कि उदयपुर संगीत और कला की धरोहर होने के बावजूद, लोक कलाकारों और शास्त्रीय परंपराओं को संरक्षित व प्रदर्शित करने के लिए कोई स्थायी मंच उपलब्ध नहीं है।

‘सुरों की मंडली’ ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि यह संग्रहालय न केवल संगीत प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यटन और स्थानीय कलाकारों के लिए भी नए अवसर उत्पन्न करेगा।

प्रस्तावित संग्रहालय की प्रमुख विशेषताएँ

  1. प्राचीन से आधुनिक वाद्ययंत्रों की जीवंत प्रदर्शनी।
  2. संगीत पुस्तकालय एवं शोध केंद्र, जिसमें दुर्लभ साहित्य और डिजिटल आर्काइव शामिल होंगे।
  3. डिजिटल संगीत अनुभव (वर्चुअल एवं ऑगमेंटेड रियलिटी आधारित)।
  4. कलाकारों के लिए कार्यशालाएँ और लाइव परफॉर्मेंस का मंच।
  5. सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रीय स्तर का संगीत महोत्सव।

‘सुरों की मंडली’ ने निवेदन किया कि इस परियोजना के लिए लगभग 50,000 से 1,00,000 वर्गफीट भूमि की आवश्यकता होगी।

कलेक्टर का सकारात्मक आश्वासन

जिला कलेक्टर नमित मेहता ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव जनहित में है और इस पर कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस विषय पर वे उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) के आयुक्त से चर्चा करेंगे।

कलेक्टर मेहता ने ‘सुरों की मंडली’ के सदस्यों को निर्देश दिया कि वे इस प्रस्तावित संग्रहालय की एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें, ताकि उसके अनुसार प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

उपस्थित प्रतिनिधिमंडल

इस अवसर पर ‘सुरों की मंडली’ के प्रतिनिधिमंडल में लक्ष्मी असवानी, अमृता बोकड़िया, नूतन बेदी, रिया कालरा, कैलाश केवलिया, मुकेश शर्मा, नारायण लाल लोहार, मोहनलाल सोनी, विष्णु वैष्णव, नरेश शर्मा, अजीत सिंह खींची, कमल जुनेजा, जय किशन असवानी, दिलीप जैन, मनोहर लाल मुखिया, रमेश दतवानी और योगेश उपाध्याय उपस्थित रहे।


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