“स्माइल उदयपुर” अभियान का शुभारंभ: बाल भिक्षावृत्ति व बाल श्रम के खिलाफ सख्त और समन्वित पहल


पर्यटन नगरी उदयपुर को बाल भिक्षावृत्ति और बाल श्रम से मुक्त करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन, बाल अधिकारिता विभाग और पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से “स्माइल उदयपुर” अभियान की शुरुआत की है। जिला कलेक्टर नमित मेहता के निर्देशन में 1 जनवरी 2026 से प्रारंभ हुआ यह अभियान राज्य में अपनी तरह का पहला नवाचारपूर्ण और सख्त प्रयोग माना जा रहा है।
अभियान का शुभारंभ कलक्ट्रेट परिसर में भिक्षावृत्ति एवं बाल श्रम के विरुद्ध शपथ और हस्ताक्षर अभियान के साथ किया गया। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक गौरव श्रीवास्तव और अतिरिक्त जिला कलेक्टर (नगर) जितेन्द्र ओझा की उपस्थिति में बाल श्रम एवं बाल भिक्षावृत्ति रेस्क्यू वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में बाल संरक्षण आयोग, श्रम विभाग, पुलिस, यूनिसेफ, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही।
तीन चरणों में लागू होगा अभियान
अभियान के नोडल अधिकारी एवं बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक के.के. चन्द्रवंशी के अनुसार “स्माइल उदयपुर” तीन चरणों में संचालित किया जाएगा। प्रथम चरण 1 से 31 जनवरी तक चलेगा, जिसमें शहरभर में निरंतर रेस्क्यू अभियान चलाकर बाल भिक्षावृत्ति और बाल श्रम में लिप्त बच्चों को मुक्त कराया जाएगा। द्वितीय चरण 2 फरवरी से 31 मार्च तक फॉलोअप पर केंद्रित रहेगा, जिसमें रेस्क्यू किए गए बच्चों का पुनर्वास, शिक्षा और काउंसलिंग सुनिश्चित की जाएगी। तृतीय चरण में प्रमुख पर्यटन और सार्वजनिक स्थलों को भिक्षावृत्ति मुक्त क्षेत्र घोषित कर आदेशों की अवहेलना पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तकनीक के सहारे सख्त निगरानी
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए अभय कमाण्ड सेंटर के सीसीटीवी कैमरों से चौराहों, पर्यटन स्थलों और सार्वजनिक स्थानों की निगरानी की जाएगी। रेस्क्यू किए गए बच्चों की जियो-टैगिंग की जाएगी, जिससे फॉलोअप और निगरानी मजबूत हो सके। किसी भी स्थान पर बाल भिक्षावृत्ति या बाल श्रम की सूचना मिलने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
जागरूकता के साथ कानून का सख्त पालन
रेस्क्यू के साथ-साथ जन-जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। “भिक्षा नहीं, शिक्षा दें” के संदेश के साथ पोस्टर, बैनर और स्टीकर लगाए जाएंगे तथा प्रतिष्ठानों को बाल श्रम व भिक्षावृत्ति मुक्त घोषित करने के लिए चिन्हित किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों, भिक्षा को बढ़ावा देने वालों और बच्चों के अधिकारों का हनन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
साझा प्रयास से लक्ष्य
पुलिस, श्रम विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, बाल अधिकारिता विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन, यूनिसेफ और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी से संचालित यह अभियान बच्चों को शोषण के दलदल से निकालकर शिक्षा, संरक्षण और सम्मानजनक जीवन से जोड़ने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि कहीं भी बाल भिक्षावृत्ति या बाल श्रम दिखाई देने पर तुरंत 1098 पर सूचना देकर उदयपुर को बाल श्रम और बाल भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनाने में सहयोग करें।









