तीन दिवसीय क्लिनिकल ट्रायल वर्कशॉप का समापन: चिकित्सकों को मिली गहन वैज्ञानिक और नैतिक जानकारी


उदयपुर, 16 अक्टूबर। आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमडीआरयू) की ओर से आयोजित तीन दिवसीय क्लिनिकल ट्रायल वर्कशॉप का सफल समापन हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को क्लिनिकल ट्रायल के वैज्ञानिक, नैतिक और नियामक पहलुओं की गहन जानकारी प्रदान करना था।
कार्यशाला का शुभारंभ आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. विपिन माथुर के आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर दत्ता मेघे उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (डीएमआईएचईआर), वर्धा से आमंत्रित प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने फैकल्टी सदस्य के रूप में भाग लिया। साथ ही भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग एवं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद से जुड़े अधिकारी भी पर्यवेक्षक और विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे।
वर्कशॉप में डीएमआईएचईआर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ डॉ. जहीरुद्दीन काजी, डॉ. नाजनी खातिब, डॉ. अभय गैधाने, डॉ. पुनीत फुलजले और डॉ. शिल्पा बावनकुले ने क्लिनिकल रिसर्च के विभिन्न आयामों पर विस्तृत सत्र संचालित किए। इन सत्रों में क्लिनिकल ट्रायल की महत्ता, प्रोटोकॉल विकास, अनुसंधान कार्यान्वयन रणनीतियाँ, नैतिक पहलू और डेटा विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई।
इसके अतिरिक्त, आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. रवि कांत और डॉ. गुंजन कुमार ने ऑनलाइन सत्रों के माध्यम से क्लिनिकल ट्रायल से जुड़ी नवीन जानकारियाँ साझा की।
प्रो. (डॉ.) एस. जेड. काजी ने कहा, “क्लिनिकल ट्रायल आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान की रीढ़ हैं। जब इन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नैतिक मानकों के साथ किया जाता है, तभी समाज को सुरक्षित और प्रभावी उपचार मिल पाता है।” प्रो. (डॉ.) अभय गैधाने ने कहा कि प्रत्येक चिकित्सक को रिसर्च से जुड़ना चाहिए, ताकि भारत में साक्ष्य-आधारित चिकित्सा को और सशक्त बनाया जा सके। डीएचआर के डॉ. विजय कृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि गुणवत्तापूर्ण क्लिनिकल ट्रायल को बढ़ावा देकर भारत चिकित्सा अनुसंधान में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है। वहीं, डॉ. अभिश्वेता ने कहा, “इस तरह की कार्यशालाएँ चिकित्सकों और शोधकर्ताओं में वैज्ञानिक सोच और रिसर्च के प्रति उत्साह जगाने में अत्यंत उपयोगी हैं।”
समापन सत्र के दौरान सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए और उन्हें भविष्य में उच्च गुणवत्ता वाले क्लिनिकल रिसर्च कार्यों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यशाला की संयोजक डॉ. गुरदीप कौर ने बताया कि इस आयोजन से प्रतिभागियों को क्लिनिकल ट्रायल की प्रक्रिया और उसकी व्यावहारिक समझ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस अवसर पर एमडीआरयू के वैज्ञानिक डॉ. शैलेष स्वामी, नितेश चौहान, निकित माथुर, कुंदरपाल, आरती, रामकिशोर, विनोद और गोपाल ने कार्यशाला को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस कार्यशाला ने चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के बीच साक्ष्य-आधारित चिकित्सा और नैतिक अनुसंधान के प्रति नई सोच और दिशा विकसित की, जिससे चिकित्सा क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शोध को नया आयाम मिलेगा।









