राजस्थान के औद्योगिक विकास में वेदांता की बड़ी पहल, 1 लाख करोड़ निवेश


राजस्थान दिवस के अवसर पर वेदांता समूह ने राज्य के विकास के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दोहराते हुए 1 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश की घोषणा की है। यह निवेश धातु, तेल-गैस और ऊर्जा क्षेत्रों में पहले से किए गए 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के अतिरिक्त होगा।
समूह अपनी प्रमुख कंपनियों हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड और केयर्न ऑयल एंड गैस के माध्यम से राजस्थान के औद्योगिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पिछले एक दशक में वेदांता ने राष्ट्रीय और राज्य के खजाने में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है।
संसाधन विकास और ऊर्जा सुरक्षा में अहम योगदान
वेदांता के निवेश से राजस्थान धातुओं, तेल और गैस के क्षेत्र में देश का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। हिंदुस्तान जिंक राजस्थान की कुल खनन रॉयल्टी में लगभग एक-तिहाई योगदान देता है, जबकि बाड़मेर-सांचोर बेसिन में केयर्न के संचालन ने इस क्षेत्र को भारत की प्रमुख ऑनशोर ऊर्जा संपत्तियों में शामिल कर दिया है।
केयर्न के निवेशों से बाड़मेर जिले में सामाजिक-आर्थिक बदलाव देखने को मिले हैं। इसके परिणामस्वरूप जिले की जीडीपी में 650 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
उत्पादन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त
वर्ष 2002 से हिंदुस्तान जिंक ने परिष्कृत धातु के उत्पादन को बढ़ाकर सालाना 10 लाख टन से अधिक कर दिया है। इसी अवधि में चांदी का उत्पादन लगभग 20 गुना बढ़ गया है, जिससे भारत चांदी का शुद्ध उत्पादक बन गया है।
आज कंपनी 40 से अधिक देशों को चांदी निर्यात कर रही है, जिससे राजस्थान वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर चुका है।
दूसरी ओर, केयर्न का बाड़मेर-सांचोर बेसिन लगातार उत्पादन बनाए हुए है। वित्त वर्ष 2025 में इसका उत्पादन 84,276 बैरल ऑयल इक्विवेलेंट प्रति दिन (BOEPD) तक पहुंच गया, जबकि संचयी उत्पादन 781 एमएमबीओई दर्ज किया गया।
रोजगार और औद्योगिक इकोसिस्टम का विस्तार
वेदांता के संचालन से राज्य में मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित हुआ है। समूह अब तक 1 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान कर चुका है। साथ ही सप्लायर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और डाउनस्ट्रीम उद्योगों के नेटवर्क के माध्यम से हजारों लोगों की आजीविका को भी मजबूती मिली है।
यह नेटवर्क उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद, अजमेर और बाड़मेर सहित कई जिलों में संचालित हो रहा है।
इन क्षेत्रों में दुनिया की कुछ प्रमुख औद्योगिक इकाइयाँ मौजूद हैं, जिनमें—
- रामपुरा आगुचा : दुनिया की सबसे बड़ी अंडरग्राउंड जिंक माइन
- चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स : दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल स्मेल्टिंग सेंटर
- मंगला ऑयल फील्ड, बाड़मेर : भारत का सबसे बड़ा ऑनशोर तेल उत्पादन क्षेत्र
हाल ही में हिंदुस्तान जिंक इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स (ICMM) में शामिल होने वाली पहली भारतीय कंपनी भी बनी है।
राजस्थान बन सकता है वैश्विक संसाधन और मैन्युफैक्चरिंग हब
वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के दृष्टिकोण से राजस्थान भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान जिंक और केयर्न के माध्यम से राज्य में पहले ही 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया जा चुका है, जिससे जिंक, चांदी और तेल-गैस के क्षेत्र में विश्वस्तरीय क्षमताएँ विकसित हुई हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि सही नीतियों और तेज गति के साथ राजस्थान प्राकृतिक संसाधनों और मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बन सकता है।
जिंक पार्क और नई तकनीकों पर जोर
भविष्य की योजनाओं के तहत वेदांता जिंक पार्क विकसित कर रहा है, जो अपनी तरह का पहला डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम होगा। इसमें लगभग 200 उद्योगों को स्थान मिलने की संभावना है, जिससे एमएसएमई और वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।
साथ ही केयर्न उत्पादन बनाए रखने के लिए एनहांस्ड ऑयल रिकवरी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है।
सामाजिक विकास में भी सक्रिय भूमिका
औद्योगिक विकास के साथ-साथ वेदांता सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय है। अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के पोषण एवं शिक्षा के लिए 25,000 से अधिक नंद घर स्थापित किए गए हैं।
हिंदुस्तान जिंक ने पिछले दशक में सामुदायिक विकास कार्यक्रमों में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
वेदांता गर्ल्स पीजी कॉलेज (रिंगस) सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से 50,000 से अधिक छात्राओं को शिक्षा प्रदान की गई है, जबकि गुरुकुल पब्लिक स्कूल और वेदांता स्कूलों के माध्यम से 25,000 से अधिक बच्चों को शिक्षा और अवसर मिले हैं।
समावेशी विकास की दिशा में पहल
कंपनी अपने संचालन में लैंगिक समानता को भी बढ़ावा दे रही है। अब महिलाएं भूमिगत खदानों में तकनीकी भूमिकाएं निभा रही हैं। वहीं केयर्न की सामाजिक पहलों से स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्रों में लगभग 20 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं।
औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण
राजस्थान में नीतिगत स्थिरता, तेज स्वीकृति प्रक्रिया और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश को आकर्षित किया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मजबूत ढांचे के कारण राज्य तेजी से प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
राजस्थान दिवस के अवसर पर वेदांता समूह ने राज्य के साथ मिलकर सतत औद्योगिक विकास, स्थानीय इकोसिस्टम को मजबूत करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।









