मुर्गीपालन के साथ मशरूम की खेती से अब आदिवासी किसान प्राप्त करेंगे अतिरिक्त आयः डॉ. मीणा


उदयपुर, 19 नवम्बर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के अधीन अनुसंधान निदेशालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के द्वारा अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अन्तर्गत गाँव-गड़ावन, तहसील-ऋषभदेव, जिला-उदयपुर में एक दिवसीय मुर्गीपालन विषय पर प्रशिक्षण दिनांक 19.11.2025 को सम्पन्न हुआ।
प्रशिक्षण में डॉ. नारायणलाल मीणा, प्रोफेसर ने किसानों को मुर्गीपालन के साथ-साथ मशरूम की खेती करने पर ज़ोर दिया जिससे अतिरिक्त आय प्राप्त हो सके तथा डॉ. मीणा के अनुसार, आदिवासी किसान मुर्गीपालन व्यवसाय के साथ मशरूम की खेती करके अपनी आय बढ़ा सकते हैं। मशरूम की खेती कम लागत में की जा सकती है और यह अतिरिक्त आय का अच्छा स्रोत है। सरकार भी इस खेती को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और प्रशिक्षण प्रदान कर रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके ।
मशरूम की खेती के अनेक फायदे उदाहरणार्थ- कम जगह में अधिक उत्पादन, 40-90% तक सरकारी सहायता, परंपरागत खेती के साथ अतिरिक्त कमाई, ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर। प्रशिक्षण में कुल 50 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया तथा प्रत्येक किसान को 20 प्रताप धन मुर्गी के नस्ल के चूजे वितरित किये गए।









